पशुपालकों के सवाल और ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब- भाग १

पशुपालकों के सवाल और ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब

पशुपालकों के सवाल और ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब के इस लेख में पशु पोषण और पशुओं की बिमारियों से सम्बंधित पशुपालकों के सवालों का जबाब ग्रोवेल के डॉक्टर के द्वारा दी जा रही हैं। पशुपालक भाई, ग्रोवेल के डॉक्टर द्वारा दी सलाह के अनुसार पशु पोषण करें और पशुओं को बीमारी से बचने का उपाय और चिकित्सा की ब्यवस्था करें।पशुओं की स्वस्थ की उचित देखभाल और उचित पशुपोषण कर पशुपालक भाई एक सफल पशुपालक बन सकेंगे और एक लाभकारी पशुपालन कर सकेंगें ।तो चलिए अब हम पशुपालकों के सवाल और पशु डॉक्टर के जबाब शुरू करतें हैं :

पशुपालकों के सवाल : पशुओं को कितना आहार देना चाहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब  :पशु का वजन जितना अधिक होगा, उसकी आहार की आवश्यकताएं उतनी ही अधिक होंगी।एक कुशल दूध देने वाली गाय को अपने शरीर के वजन के कम से कम 3% के बराबर प्रतिदिन संतुलित सूखे पशु आहार की आवश्यकता होती है।उदाहरण: एक 600 किग्रा गाय को 600 किग्रा / 3% = 18 किग्रा प्रतिदिन संतुलित सूखे पशु आहार आवश्यकता होती है।अधिक दूध देने वाली गायें अपने शरीर के वजन का 4% से अधिक प्रतिदिन संतुलित सूखे पशु आहार खाएँगी।उदाहरण: अधिक दूध देने वाली (30 लीटर/दिन से अधिक) 600 किग्रा गाय को 600 किग्रा / 4% = 24 किग्रा प्रतिदिन संतुलित सूखे पशु आहार प्रतिदिन की आवश्यकता होती है।

पशुपालकों के सवाल : यदि हरा चारा पर्यापत मात्रा में उपलब्ध न हो तो क्या दाने की मात्रा बढाई जा सकती है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब :  हाँ, यदि हरा चारा पर्यापत मात्रा में उपलब्ध न हो तो दाने की मात्रा बढाई जा सकती है।

पशुपालकों के सवाल : पशु आहार सम्बन्धित क्या पशु का आहार घर में बनाया जा सकता है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : हाँ, घर पर दाना मिश्रण बनाने के लिए निम्न छटकों की आवश्यकता होती है:- (क) खली = 25-35 किलो (ख) दाना(मक्का, जौई , गेहूं आदि) = 25-35 किलो (ग) चोकर = 10-25 किलो (घ) दालों के छिलके = 05-20 किलो (ङ) एक से दो किलो ग्रोवेल का मिनरल्स-मिक्सचर

खाने के बाद प्रतिदिन ग्रोवेल का ग्रोविट पॉवर (Growvit Power)  २० मिली . सुबह २० मिली शाम ,पशु के मुहँ में प्रति पशु देना चाहिये ।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं के लिए रोज़ घर में दाना मिश्रण बनाने की कोई सामान्य विधि बताएं ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : दाना मिश्रण बनाने की घरेलू विधि इस प्रकार है:- 10 किलो दाना मिश्रण बनाने के लिये: अनाज, चोकर और खली की बराबर मात्रा (3. 3 किलो ग्राम प्रति) डाल दें। इस मिश्रण में आधा किलो चिलेटेड ग्रोमिन फोर्ट ( Chelated Growmin Forte) और आधा किलो इम्यून बूस्टर प्रीमिक्स (Immune Booster Premix) मिलायें। दाना बनाने के लिए पहले गेहूं, मक्का आदि को अच्छी दरड़ लें। और खली को कूट लें। यदि खली को कूट नहीं सकते तों एक दिन पहले खली को किसी बर्तन में डालकर पानी में भिगो लें। अगले दिन उसमें बाकि अव्यवों को (दाना,चोकर,नमक,खनिज मिश्रण) इस में मिलाकर हाथ से मसल दें। इस दाने को कुतरे हुए चारे/घास में मिलाकर पशु को खिला सकते हैं।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं के आहार व पानी की दिनचर्या कैसी होनी चहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : क) चारा बांट कर दिन में 3-4 बार खिलना चहिये। (ख) दाना मिश्रण भी 2 बार बराबर- बराबर खिलाना चहिये। (ग) हरा और सूखा चारा (भूसा और घास) मिश्रित कर खिलाना चाहिये। (घ) घास की कमी के दिनों साइलेज उपलब्ध कराना चाहिये। (ङ) दाना, चारे के उपरांत खिलाना चाहीये। (च) प्रतिदिन औसतन गाय को 35-40 लीटर पानी कि आवश्यकता होती है।पानी में हमेशा Aquacure एक्वाक्वोर मिलकर देनी चाहिये।

पशुपालकों के सवाल : नवजात बछड़ों का पोषण कैसे करें ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : अच्छा पोषण ही बछड़ों- बछड़ियों को दूध / काम के लिये सक्षम बनाता है। नवजात बछड़ों के लिये कोलोस्ट्रल (खीस) का बहुत महत्व है। इस से बिमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। और बछड़े- बछड़ियों का उचित विकास होता है। इसके लिए बछड़ों- बछड़ियों को को नियामित रूप से ग्रोवेल का अमीनो पॉवर  (Amino Power) दें ।

पशुपालकों के सवाल : बछड़ों- बछड़ियों को खीस कितना और कैसे पिलाना चाहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : सबसे ध्यान देने योग्य बात है कि पैदा होने के बाद जितना जल्दी हो सके खीस पिलाना चाहिये। इसे गुनगुना (कोसा) कर के बछड़े के भार का 10 वां हिस्सा वज़न खीस कि मात्रा 24 घंटों में पिलाएं। जन्म के 24 घंटों के बाद बछड़े की आंतों की प्रतिरोधी तत्व (इम्यूनोग्लोब्यूलिन) को सीखने की क्षमता कम हो जाती है। और तीसरे दिन के बाद तों लगभग समाप्त हो जाती है। इसलिए बछडों को खीस पिलाना आवश्यक है।

पशुपालकों के सवाल : बछड़ों- बछड़ियों को खीस के इलावा और क्या खुराक देनी चाहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : पहले तीन हफ्ते बछडों को उनके शरीर का दसवां भाग दूध पिलाना चाहिये। चौथे और पांचवे हफ्ते शरीर के कुल भाग का 1/15 वां भाग दूध पिलाएं। इसके बाद 2 महीने की उम्र तक 1/20 वां भाग दूध दें। इसके साथ-साथ शुरुआती दाना यानि काफ स्टार्टर और उस के साथ अच्छी किस्म का चारा के साथ मिनरल्स-मिक्सचर मिला कर देनी चाहिये।

प्रश्न: मिल्क फीवर या सूतक बुखार क्या होता है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : ये एक रोग है जो अक्सर ज्यादा दूध देने वाले पशुओं को ब्याने के कुछ घंटे या दिनों बाद होता है। रोग का कारण पशु के शरीर में कैल्शियम की कमी। सामान्यतः ये रोग गायों में 5-10 वर्ष कि उम्र में अधिक होता है। आम तौर पर पहली ब्यांत में ये रोग नहीं होता। इसके उपचार की लिए ग्रोवेल का ग्रो-कैल डी3 (Grow-Cal D 3 ) दें ।

पशुपालकों के सवाल : मिल्क फीवर को कैसे पहचान सकते है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : इस रोग के लक्षण ब्याने के 1-3 दिन तक प्रकट होते है। पशु को बेचैनी रहती है। मांसपेशियों में कमजोरी आ जाने के कारण पशु चल फिर नही सकता पिछले पैरों में अकड़न और आंशिक लकवा की स्थिती में पशु गिर जाता है। उस के बाद गर्दन को एक तरफ पीछे की ओर मोड़ कर बैठा रहता है। शरीर का तापमान कम हो जाता है।

पशुपालकों के सवाल : खूनी पेशाब या हीमोग्लोबिन्यूरिया रोग क्यों होता है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : ये रोग गायों-भैसों में ब्याने के 2-4 सप्ताह के अंदर ज्यादा होता है ओर गर्भवस्था के आखरी दोनों में भी हो सकता है। भैसों में ये रोग अधिक होता है। ओर इसे आम भाषा में लहू मूतना भी कहते है। ये रोग शरीर में फास्फोरस तत्व की कमी से होता है। जिस क्षेत्र कि मिट्टी में इस तत्व कि कमी होती है वहाँ चारे में भी ये तत्व कम पाया जाता है। अतः पशु के शरीर में भी ये कमी आ जाती है। फस्फोरस की कमी उन पशुओं में अधिक होती है जिनको केवल सूखी घास, सूखा चारा या पुराल खिला कर पाला जाता है

पशुपालकों के सवाल : खुर-मुँह रोग की रोक-थाम कैसे कर सकते है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : इस बीमारी की रोकथाम हेतु, पशुओं को निरोधक टीका अवश्य लगाना चाहिये। ये टीका नवजात पशुओं में तीन सप्ताह की उम्र में पहला टीका, तीन मास की उम्र में दूसरा टीका और उस के बाद हर छः महीने में टीका लगाते रहना चाहिये।

पशुपालकों के सवाल: गल घोंटू रोग के क्या लक्षण है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : तेज़ बुखार, लाल आँखें , गले में गर्म/दर्द वाली सूजन गले से छाती तक होना, नाक से लाल/।झागदार स्त्राव का होना।

पशुपालकों के सवाल: पशुओं की संक्रामक बीमारियों से रक्षा किस प्रकार की जा सकती है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : (क) पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बचाव के टीके लगवा लेने चाहिये । (ख) रोगी पशु को स्वस्थ पशु से तुरन्त अलग कर दें व उस पर निगरानी रखें। (ग) रोगी पशु का गोबर , मूत्र व जेर को किसी गढ़ढ़े में दबा कर उस पर विराक्लीन ( Viraclean ) डाल दें। (घ) मरे पशु को जला दें या कहीं दूर 6-8 फुट गढ़ढ़े में दबा कर उस पर विराक्लीन ( Viraclean ) डाल दें। (ड़) पशुशाला के मुख्य द्वार पर ‘फुट बाथ’ बनवाएं ताकि खुरों द्वारा लाए गए कीटाणु उसमें नष्ट हो जाएँ। (च) पशुशाला की सफाई नियमित तौर पर विराक्लीन ( Viraclean ) से करें।पशुशाला को विषाणुरहित रखने के लिये ,पशुशाला में नियमित रूप से विराक्लीन ( Viraclean ) का छिड़काव करनी चाहिये।(छ) नियमित रूप से पशुओं को अमिनो पावर (Amino Power) , ग्रौलिव फोर्ट(Growlive Forte) , ग्रो कैल डी (Grow Cal D3) टॉनिक देनी चाहिये । पानी में हमेशा Aquacure एक्वाक्वोर मिलकर देनी चाहिये।

पशुपालकों के सवाल : सर्दियों में बछड़े- बछड़ियों को होने वाली प्रमुख बीमारियों के नाम बताएं।

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : क) नाभि का सड़ना (ख) सफेद दस्त। (ग) न्यूमोनिया (घ) पेट के कीड़े (ड़) पैराटाईफाइड़

पशुपालकों के सवाल : पशुशाला की धुलाई सफाई के लिये क्या परामर्श है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : पशुशाला को हर रोज़ पानी से झाड़ू द्वारा साफ़ कर देना चाहिये। इस से गोबर व मूत्र की गंदगी दूर हो जाती है। पानी से धोने के बाद एक बाल्टी पानी में विराक्लीन ( Viraclean ) डाल कर धोना चाहिये । इस से जीवाणु ,जूं, किलनी तथा विषाणु इत्यादि मर जाते हैं, पशुओं की बीमारियां नहीं फैलती और स्वच्छ दूध उत्पादन में मदद मिलती है।पशुशाला को विषाणुरहित रखने के लिये ,पशुशाला में नियमित रूप से विराक्लीन ( Viraclean ) का छिड़काव करनी चाहिए ।

पशुपालकों के सवाल : संकर पशुओं से कितनी बार दूध निकालना चाहिए ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : अधिक दूध देने वाले संकर पशुओं से दिन में तीन बार दूध निकालना चाहिये और दूध निकालने के समय में बराबर का अंतर होना चाहिये। अगर पशु कम दूध देता है तो दो बार (सुबह और शाम को) दूध निकालना उचित है, लेकिन इसके बीच भी बराबर समय होना चाहिये। इस से दूध का उत्पादन बढ़ जाता है और निश्चित समय पर पशु स्वयं दूध निकलवाने के लिए तैयार हो जाता है।

पशुपालकों के सवाल : दुधारू पशुओं को सुखाने का परामर्श डाक्टर क्यों देते है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : ग्याभिन अवस्था में पशु और बच्चे दोनों को अधिक खुराक कि आवश्यकता होती है। अतः ब्याने से तीन माह पहले पशु का दूध निकालना बंद कर देना चाहिये, ताकि आगे ब्यांत में भी भरपूर दूध मिल सके।

पशुपालकों के सवाल: ग्याभिन पशु की पहचान कैसे की जा सकती है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : (क) ग्याभिन होने पर पशु दोबारा २०-२१ दिन गर्मी नही आती। (ख) तीन चार मास में पशु का पेट फूला नज़र आने लगता है। (ग) पशु कि गुदां में हाथ डाल कर बच्चेदानी का दो में से एक हॉर्न का बढ़ा होना महसूस किया जा सकता है। लेकिन यह परीक्षण केवल प्राशिक्षित व अनुभवी पशु चिकित्सक से ही करवाना चाहिये।

पशुपालकों के सवाल: बछड़े- बछड़ियों में नाभि का सड़ना क्या होता है ? इसकी रोकथाम के उपाय बताएं |

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : इसे अंग्रेजी में “नेवल इल” कहते हैं। नवजात बछड़ों में सफाई की कमी से नाभि में पीप (मवाद) पड़ जाती है। नाभि चिपचिपी दिखाई देती है और उस में सूजन व पीड़ा हो जाती है। बछड़ा सुस्त हो जाता है और जोड़ों के सूजने से लंगडाने लगता है। इसकी रोक थाम के लिये नाभि को किसी कीट नाशक से साफ़ करके पेन्सिलिन तब तक लगाएं जब तक नाभि सूख न जाए।

पशुपालकों के सवाल: बछड़े- बछड़ियों में सफेद दस्त क्यों होती है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : अंग्रजी में “ व्हाइट सकाऊर “ नामक यह प्राणघातक रोग है जोकि 24 घण्टे में ही बछड़े की मृत्यु का कारण बन सकता है। इसमें बुखार आता है , भूख कम लगती है और बदहज़मी हो जाती है। पतले दस्त होते हैं जिस से बदबू आती है। इस से खून भी आ सकता है। इससे बचाव के लिये बछडों को प्रयाप्त खीस पिलाएं। दस्त होने पर ग्रोवेल का एलेक्ट्रल एनर्जी ( Electral Energy ) दें।सुधार नहीं होने पर डॉक्टर से संपर्क करें ।

पशुपालकों के सवाल: बछड़े- बछड़ियों में होने वाले न्यूमोनिया रोग पर प्रकाश डालें।

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : यह रोग गन्दे व सीलन वाले स्थानों में रहने वाले पशुओं में अधिक फैलता है। यह रोग 3-4 मास के बछड़ों में सबसे अधिक होता है। इस रोग के लक्षण है – नाक व आंख से पानी बहना,सुस्ती, बुखार,साँस लेने में दिक्कत, खांसी व अंत में मृत्यु। इस घातक रोग से बचाव के लिये पशुओं को साफ़ व हवाद बाड़ों में रखें। और अचानक मौसम/तापमान परिवर्तन से बचाएं। पशुशाला को विषाणुरहित रखने के लिये ,पशुशाला में नियमित रूप से विराक्लीन ( Viraclean ) का छिड़काव करनी चाहिए ।

पशुपालकों के सवाल: बछड़े- बछड़ियों को पेट के कीड़ों से कैसे बचाया जा सकता है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : दूध पीने वाले बछड़ों के पेट में आमतौर पर लम्बे गोल कीड़े हो जाते हैं। इससे पशु सुस्त हो जाता है, खाने में अरुचि हो जाती है और आँखों की झिल्ली छोटी हो जाती है। इस से बचने के लिये बछड़ों को साफ़ पानी पिलाएं, स्वस्थ बछड़ों को अलग रखें क्योंकि रोगी बछड़ों के गोबर में कीड़ों के अण्डे होते है।कीड़े हो जाने पर कीड़े मारने के लिए किसी अच्छे कम्पनी का डीवार्मर दें ,कीड़े से बचाव के लिए  ग्रोवेल का ग्रोलिव फोर्ट (Growlive Forte) दें  लाभ होगा।

पशुपालकों के सवाल: बछड़े- बछड़ियों में पैराटाईफाइड़ रोग के बारे में जानकारी दें।

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : यह रोग दो सप्ताह से 3 महीने के बछड़ों में होता है। यह रोग गंदगी और भीड़ वाली गौशालाओं में अधिक होता है। इस के मुख्य लक्षण – तेज़ बुखार, खाने में अरुचि, थंथन का सूखना, सुस्ती। गोबर का रंग पीला या गन्दला हो जाता है व बदबू आती है।इस रोग से बचाव के लिए साफ – सफाई का ध्यान रखें और रोग होते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

पशुपालकों के सवाल: बछड़ों में पेट के कीड़ों (एस्केरियासिस) से कैसे बचा जा सकता है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : इस रोग की वजह से बछड़े को सुस्ती, खाने में अरुचि, दस्त हो जाते हैं। व इस रोग की आशंका होते ही तुरन्त पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

पशुपालकों के सवाल: पशुओं में अफारा रोग के क्या-क्या कारण हो सकते है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : क) पशुओं को खाने में फलीदार हरा चारा, गाजर, मूली,बन्द गोभी अधिक देना विशेषकर जब वह गले सड़े हों। (ख) बरसीम, ब्यूसॉन , जेई, व रसदार हरे चारे जो पूरी तरह पके न हों व मिले हों। (ग) भोजन में अचानक परिवर्तन कर देने से। (घ) भोजन नाली में कीड़ों, बाल के गोले आदि से रुकावट होना। (ड़) पशु में तपेदिक रोग का होना। (च) पशु को चारा खिलाने के तुरन्त बाद पेट भर पानी पिलाने से।

पशुपालकों के सवाल: पशुओं में अफारा रोग के क्या-क्या लक्षण है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : (क) अफारा रोग के लक्षणभुत स्पष्ट होते हैं। बाईं ओर की कील फूल जाती है और पेट के आकार बढा हुआ दिखाई देता है। (ख) पेट दर्द और बेचैनी के कारण पशु भूमि पर पैर मारता है और बार-बार डकार लेता है। (ग) रयुमन का गैसों से अधिक फूल जाने के कारण छाती पर दबाव बढ़ जाता है जिस से साँस लेने में तकलीफ होती है। (घ) पशु खाना बन्द कर देता है और जुगाली नहीं करता। (ड़) यह समस्या भेड़ों में अधिक गंभीर होती है और अधिक अफारा होने पर उन की मृत्यु हो जाती है।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं में अफारा रोग हो जाने पर ईलाज का प्रबंध कैसे करें ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : अफारा होने पर इलाज में थोड़ी देरी भी जान लेवा हो सकती है। अफारा होने पर निम्नलिखित उपाय करे जा सकते है:- (क) रोगी का खाना तुरन्त बन्द कर दें। (ख) तुरन्त डाक्टर से संपर्क करें। ध्यान रहें की दवाई देते समय पशु की जुबान न पकडें। (ग) जहां तक हो सके पशु को बैठने न दें व धीरे-धीरे टहलाएं। इससे अफारे में आराम मिलेगा। (घ) पशु को साफ व समतल जगह पर रखें। (ङ) अफारा का इलाज बहुत सरल है,पशु को ग्रोलिव फोर्ट ( Growlive Forte ) सुबह – शाम नियमित रूप से दें। (च) अफारा उतर जाने पर तुरन्त खाने को नही देना चाहिये जब तक पेट अच्छे से साफ़ न हो जाए।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं में अफारा रोग से कैसे बचाव करना चाहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : (क) पशुओं को चारा डालने से पहले ही पानी पिलाना चाहिये। (ख) भोजन में अचानक परिवर्तन नहीं करना चाहिये। (ग) गेहूं, मकाई या दूसरे अनाज अधिक मात्रा में खाने को नहीं देने चाहिये। (घ) हर चारा पूरी तरह पकने पर ही पशुओं को खाने देना चाहिये। (ड़) पशुओं को प्रतिदिन कुछ समय के लिये खुला छोड़ना चाहिये।पशु को ग्रोलिव फोर्ट ( Growlive Forte ) सुबह – शाम नियमित रूप से दें , फायदा होगा ।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं में लंगड़ा बुखार कब और कहाँ होता है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : यह रोग बरसात शुरू होते ही फैलने लगता है। गर्म और आद्र क्षेत्रों में यह रोग आमतौर पर होता है।जिस जगह यह रोग एक बार हो जाए वहाँ ये प्रायः हर वर्ष होता है। इस रोग का हमला एक साथ बहुत से पशुओं पर तो नहीं होता पर जो पशु इस की चपेट में आ जाए वो बच नहीं पाता। इस रोग को “ब्लैक क्वार्टर”, “ब्लैक लैग” व पुट्ठे की सूजन का रोग भी कहते हैं।

पशुपालकों के सवाल : लंगड़ा बुखार होने का क्या कारण है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : यह रोग गौ जाति के पशुओं में क्लोस्ट्रीड़ियम सैप्टिकनामक कीटाणु से होता है। ये कीटाणु पशु के रक्त में नही बल्कि रोगी की माँस-पेशियों व मिट्टी तथा खाने-पीने की वस्तुओं में पाया जाता है।

पशुपालकों के सवाल: पशुओं में लंगड़ा रोग के लक्षण बताएं ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : पशुओं में लंगड़ा रोग के निम्नलिखित लक्षण है:- (क) पशु पिछली टांगों से लड़खड़ता है व कांपता है। (ख) पुट्ठे में सूजन आ जाती है। (ग) शरीर के अधिक मास वाले भाग (गर्दन,कंधे,पीठ,छाती आदि) में भी सूजन हो सकती है। (घ) सूजे हुए भाग पहले सख्त , पीड़ादायक व गर्म होते हैं। इन में एक प्रकार की गैस पैदा हो जाति है। रोग के लक्षण प्रकट होने के 48 घण्टे में रोगी की मृत्यु हो सकती है । रोग के लक्षण दिखते ही स्थानीय डॉक्टर से संपर्क करें ।

पशुपालकों के सवाल: पशुओं में लंगड़ा रोग का इलाज कैसे करना चाहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : एंटीबायोटिक दवा और टीका लाभकारी होता है। लेकिन ये टीका आरम्भ में ही लाभदायक होते हैं।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं को लंगड़ा रोग से कैसे बचाएं ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : जिस क्षेत्र में यह रोग होता है वहाँ के पशुपालक अपने 4 मास से 3 वर्ष के सभी गौ जाति के पशुओं को इस रोग के बचाव का टीका अवश्य लगवाएँ। इस टीके का असर 6 माह तक रहता है। मई में यह टीका अवश्य लगवा लेना चाहिये। भेड़ों में उन कतरने या बच्चा देने से पहले यह टिका लगवा लेने चाहिये।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं में लंगड़ा रोग फैलने पर क्या करना चाहिये ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : (क) पशु चकित्सक से तुरन्त संपर्क कर के बचाव टीका (वैक्सीन) पशुओं को लगवा लेना चाहिये। (ख) रोग कि छूत फैलने से रोकने के लिये मरे पशुओं व भूमि में 2-2.5 मीटर की गहरई तक चूने से ढक कर दबा देना चाहिये। (ग) जिस पशुघर में किसी पशु की मृत्यु हुई हो उसे विराक्लीन ( Viraclean ) मिले पानी से धोने चाहिये।फर्श पर और पशुशाला में विराक्लीन ( Viraclean ) का छिड़काव करें ।

पशुपालकों के सवाल : पशुओं में लंगड़ा रोग की छूत कैसे लगती है ?

ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब : गौ जाति के पशुओं में इस रोग कि छूत खाने-पीने की वस्तुओं द्वारा फैलती हैं। भेड़ों में यह रोग ऊन उतारने , पूछँ काटने और नपुँसक करने के पश्चात हो सकता है ।

पशुपालक भाई इस लेख में दिये गये ग्रोवेल के डॉक्टर के सलाह को अमल करें और सफल और समृद्ध पशुपालक बनें और अपने पशुपालक मित्रों का भी मार्गदर्शन करें।

कृप्या आप इस लेख को भी पढ़ें पशुपालकों के सवाल और ग्रोवेल के डॉक्टर का जबाब – भाग २

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